मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है ग्राम लोखरतलाई 

 

साग भाजी, मिट्टी के बर्तन और भगवान की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है ग्राम लोखरतलाई 

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मोरन नदी के किनारे बसे गांव की खेती-बाड़ी के बाद दूसरी आर्थिक व्यवस्था है मिट्टी के बर्तन और साग भाजी

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जितेंद्र मालवीय की ग्राम लोखरतलाई से नर्मदा केसरी के लिए विशेष रिपोर्ट : कृपया सब्सक्राइब कीजिए

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1700 की आबादी वाला मोरन नदी के किनारे बसा ग्राम लोखरतलाई  सिवनी मालवा क्षेत्र में मिट्टी के बर्तन, दुर्गाजी गणेशजी की मूर्तियां और साग भाजी के लिए प्रसिद्ध है । यहां की सभी चीजें खुले बाजार में भाव से कम कीमत में मिलती हैं और गुणवत्ता लिए होती हैं । 20-25 आदिवासी ग्रामों से जुड़े हुए होने के कारण आदिवासी अंचल का केंद्र प्रधान गांव है । गांव में सामान्य वर्ग के गिनेचुने लेकिन पिछड़ा वर्ग और आदिवासी वर्ग की संख्या अधिक है ।

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मोरन नदी का किनारे होने के कारण गांव के कीर और कहार समूह के लोग मोरन नदी में साग भाजी के साथ-साथ डंगर तरबूज भी उगाते हैं । लोखरतलाई के साग भाजी और डांगर तरबूज स्वादिष्ट तो होते ही हैं कम कीमत में भी मिलते हैं । लोखरतलाई में लगातार 8 महीना तक साग भाजी का जमकर व्यवसाय होता है । मोरन नदी में पैदा होने वाली साग भाजी गांव के खेतीहर मजदूर के लिए मजबूत आर्थिक व्यवस्था सिद्ध होती है । लोखर तलाई के सब्जी लगाने वाले कैलाश कहार, कोमल, विजय, चैनसिंह, किरन, महेश, अर्जुन कीर बताते हैं कि मोरन नदी में खीरा, टमाटर, लौकी, गिलकी, कद्दू, तुरई, बल्लर सहित अन्य सब्जियां इस तादाद में पैदा की जाती है कि उन्हें सिवनी मालवा के साथ-साथ होशंगाबाद की मंडी में भी बेचा जाता है ।

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इसी तरह मिट्टी का काम करने वाले मूर्तिकार रामाधार मालवीय, गोलू प्रजापति बताते हैं कि हम लगातार 6-8 महीने तक इस काम में व्यस्त रहते हैं । पूरा परिवार ही मिट्टी के बर्तन विभिन्न प्रकार की मूर्तियां और तीज, त्योहार पर उपयोग में आने वाली बैल जोड़ी, हाथी जैसी मूर्तियां बनाने में व्यस्त रहते हैं । लोखरतलाई में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले रमेश प्रतापति, देवलाल, अमरसिंह, अर्जुन, मुकेश, सोनलाल प्रजापति मिट्टी की मूर्ति और बर्तन सिवनी मालवा के साथ-साथ हरदा इटारसी और होशंगाबाद जैसे शहरों में भी खूब बिकती हैं । गर्मी के दिनों में बिकने वाले देसी फ्रीजर के नाम के मटके और दीपावली पर कलात्मक दिए की बिक्री अधिक होती है ।

गांव की फाइल 

गांव की आबादी 1700

हर चुनाव में मतदान 85% से अधिक

साक्षरता पुरुष 85%

साक्षरता महिला 95%

तहसील मुख्यालय से दूरी 13 किलोमीटर

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