अवैध शराब बिक्री के खिलाफ छापे : दो गांव में चार प्रकार बने

 

अवैध शराब के कारोबार की लगातार शिकायत और कलेक्टर से मिलने के बाद 

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आबकारी विभाग जागा : अवैध शराब के खिलाफ की कार्रवाई

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दो गांव में चार स्थानों से अवैध शराब जप्त : प्रकरण पंजीबद्ध किये 

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सिवनी मालवा । तहसील क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की लगातार शिकायतों पर  कार्यवाही होते ना देख ग्रामीण जन मंगलवार को कलेक्टर ऑफिस पहुंच गए । जहां उन्होंने अधिकारियों से अवैध शराब बिक्री की शिकायत की साथ आंदोलन की चेतावनी दी थी । 

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तब जाकर जिला प्रशासन और आबकारी विभाग नींद से जागा । प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बुधवार को आबकारी विभाग की टीम ने ग्राम धमासा एवं ग्राम बाबरी में दबिश दी। दोनों गांव से चार स्थानों पर अवैध शराब जप्त कर प्रकरण पंजीबद्ध किए हैं ।

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आबकारी उपनिरीक्षक हेमंत चौकसे के नेतृत्व में की गई कार्रवाई ।

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 ग्राम धमासा में दो स्थानों से अवैध शराब बरामद

1. राधा बाई के पास से 4 लीटर हाथ भट्टी मदिरा जब्त की गई।

2. राहुल कटारे के घर से 50 पाव देशी प्लेन मदिरा बरामद हुई।

ग्राम बाबरी घाट में कार्रवाई

इसी क्रम में ग्राम बाबरी घाट में भी दबिश देकर अवैध शराब जब्त की गई।

1. मनीषा उडके के पास से 1 लीटर हाथ भट्टी मदिरा बरामद।

2. आशीष यदुवंशी द्वारा दी गई सूचना के आधार पर 08 बोतल बीयर एवं 18 पाव विदेशी मदिरा जब्त की गई।

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आबकारी उपनिरीक्षक हेमंत चौकसे ने बताया कि इन सभी मामलों में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(1) के अंतर्गत कुल 04 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए। कार्रवाई पूरी तरह नियमपूर्वक की गई तथा मौके पर उपलब्ध सभी साक्ष्यों का संकलन कर आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

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ना कानून, ना व्यवस्था : गांव-गांव में फैलता अवैध शराब का जाल

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 विकासखंड के गांव-गांव में फैलती अवैध शराब की बिक्री आज एक गहरी सामाजिक बीमारी बन चुकी है। पंचायतों और ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर विरोध के बावजूद, नशे का यह ज़हर खुलेआम बिक रहा है — प्रशासन मौन है, जनप्रतिनिधि निष्क्रिय

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कभी जो शराब की दुकानों की गिनती उंगलियों पर की जा सकती थी, आज वह गांव-गांव के चौराहों, पान ठेलों और किराना दुकानों तक पहुंच चुकी है। जहां नजर घुमाइए, वहां शराब की बोतलें बिकती दिखाई देती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह शराब युवा वर्ग को तेजी से अपने शिकंजे में ले रही है।

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नर्मदा तट बनें नशे के अड्डे

श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माने जाने वाले नर्मदा तटों पर भी अब शराब की दुर्गंध फैली हुई है। तीर्थ यात्रियों के बीच शराबी तत्वों की बदतमीज़ी आम हो चुकी है। क्या यह प्रशासन की आंखों से ओझल है ? या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है ।

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प्रशासन से सीधा सवाल

1.आखिर क्यों नहीं की जाती अंग्रेजी शराब की दुकानों पर कार्यवाही ?

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2.क्यों ग्राम पंचायतें प्रस्ताव पारित कर कार्रवाई की मांग नहीं कर रहीं ?

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3.क्या शराब माफिया के सामने प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों बेबस हैं ?

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