वृद्धों का पोषण करना हमारा परम कर्तव्य : न्यायाधीश तबस्सुम खान
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सिवनीमालवा । “हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं। जिनके अनुभवों से हमें जीवन की राह आसान और सफल बनाने की सीख मिलती है। उनका पोषण करना और उन्हें स्वस्थ रखना हमारा परम कर्तव्य है।” यह विचार जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती तबस्सुम खान ने विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर स्थानीय वरिष्ठ नागरिक गृह में आयोजित वृद्ध स्वास्थ्य परीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर में व्यक्त किए।
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न्यायाधीश श्रीमती खान ने कहा कि हमारे बुजुर्ग हमारे लिए केवल परिवार ही नहीं बल्कि समाज के मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने अपने अनुभव और संघर्षों से हमें जीवन जीने की दिशा दिखाई है। इसलिए उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति, सम्मान और स्वास्थ्य की देखभाल करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक और सामाजिक दायित्व है।
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उन्होंने बताया कि कानून में यह स्पष्ट प्रावधान है कि माता-पिता अपने बच्चों से भरण-पोषण का अधिकार प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें विधिक सहायता केंद्र के माध्यम से निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराए जाते हैं। कोई भी वरिष्ठ नागरिक न्यायालय में अपना प्रकरण प्रस्तुत कर बच्चों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकता है।

इस अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सकीय टीम द्वारा 28 वरिष्ठ नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। डॉ. ऋषि चौबे, डॉ. धरा राजनेगी और डॉ. आदिल खान ने वृद्धजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श दिया। टीम के साथ लेब ऑपरेटर अभिषेक ओसवाल एवं संतोष लोवंशी द्वारा विभिन्न जांचें की गईं और वरिष्ठ नागरिकों को दवाइयाँ भी प्रदान की गईं।
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कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिक गृह के अधीक्षक श्याम बनकर, नलिनी मालवीय, दीपक यादव, राहुल बाथव एवं सुनीता भामदरे सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल वृद्धजनों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक सार्थक प्रयास है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि बुजुर्गों की देखभाल करना केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक दायित्व भी है। न्यायालय की पहल से यह स्पष्ट होता है कि कानून भी वृद्धजनों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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👉 बुजुर्गों के अनुभव हमारे लिए मार्गदर्शन हैं और उनका पोषण करना समाज का परम कर्तव्य।









