पहले तीन-चार, अब हर गांव में शराब की दुकान

 

ना कानून, ना व्यवस्था : गांव-गांव में फैलता अवैध शराब खोरी का जाल

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विशेष संवाददाता | नर्मदा केसरी न्यूज़ नेटवर्क, सिवनी मालवा

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सिवनी मालवा। विकासखंड के गांव-गांव में फैलती अवैध शराब की बिक्री आज एक गहरी सामाजिक बीमारी बन चुकी है। पंचायतों और ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर विरोध के बावजूद, नशे का यह ज़हर खुलेआम बिक रहा है — प्रशासन मौन है, जनप्रतिनिधि निष्क्रिय।

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पहले तीन-चार, अब हर गांव में शराब की दुकान

कभी जो शराब की दुकानों की गिनती उंगलियों पर की जा सकती थी, आज वह गांव-गांव के चौराहों, पान ठेलों और किराना दुकानों तक पहुंच चुकी है। जहां नजर घुमाइए, वहां शराब की बोतलें बिकती दिखाई देती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह शराब युवा वर्ग को तेजी से अपने शिकंजे में ले रही है।

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नर्मदा तट बनें नशे के अड्डे

श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माने जाने वाले नर्मदा तटों पर भी अब शराब की दुर्गंध फैली हुई है। तीर्थ यात्रियों के बीच शराबी तत्वों की बदतमीज़ी आम हो चुकी है। क्या यह प्रशासन की आंखों से ओझल है ? या जानबूझकर अनदेखी की जा रही है ?

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आबकारी विभाग की ‘सद्भावना’ कार्यवाही

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हर कार्रवाई महुआ और लहान की— अंग्रेजी शराब पर एक भी प्रकरण नहीं। आबकारी विभाग की यह ‘चयनात्मक सक्रियता’ कई सवाल खड़े करती है। क्या विभाग जानबूझकर अंग्रेजी शराब के कारोबारियों को संरक्षण दे रहा है?

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महिलाओं की गुहार भी बेअसर

ग्वाडी दौरे के समय ग्रामीण महिलाओं ने खुद कलेक्टर को अवैध शराब की शिकायत की थी। कुछ समय के लिए कार्रवाई हुई, पर शराब माफिया पहले से दोगुनी ताकत के साथ लौट आया। यह स्थिति दर्शाती है कि ‘अस्थायी कार्रवाई’ इस गंभीर समस्या का हल नहीं हो सकती ।

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प्रशासन से सीधा सवाल

1.आखिर क्यों नहीं की जाती अंग्रेजी शराब की दुकानों पर कार्यवाही ?

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2.क्यों ग्राम पंचायतें प्रस्ताव पारित कर कार्रवाई की मांग नहीं कर रहीं ?

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3.क्या शराब माफिया के सामने प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों बेबस हैं ?

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समाज को नशे से बचाने का समय आ गया है

यह लेख किसी प्रकार का उपदेश नहीं, बल्कि गांव-गांव में बर्बाद होती एक पूरी पीढ़ी की चीख है।

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अब समय आ गया है कि हर पंचायत, हर मोहल्ला, हर नागरिक उठ खड़ा हों और शराब की बिक्री के खिलाफ एकजुट हों ।

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गांवों को नशा मुक्त बनाने का सपना केवल सरकार की नीतियों से नहीं, जनजागृति और सामाजिक चेतना से ही संभव है।

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हमारा संकल्प: अब गांव-गांव में नहीं बिकेगी शराब !

@ सरपंच-सचिव को जागरूक करें

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@ ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करें

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@ नशे के खिलाफ जन अभियान चलाएं

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@ प्रशासन पर दबाव बनाएं कि अंग्रेजी शराब बेचने वालों पर कार्यवाही हो

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यदि अब भी चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।

यह एक सामाजिक युद्ध है — और इसकी जीत समाज की, पीढ़ियों की, और नैतिकता की होगी।

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