हर साल सैकड़ों आदिवासी बच्चे छोड़ देते हैं पढ़ाई

 

सात माध्यमिक शाला के बीच एक भी हाई सेकेंडरी स्कूल नहीं 

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दूरी अधिक होने के कारण हर साल सैकड़ों आदिवासी बच्चे छोड़ देते हैं पढ़ाई

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आदिवासी अंचल में छात्राओं ने स्कूल खुलवाने एसडीएम से लगाई गुहार

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एसडीएम के निरीक्षण में 2 स्कूल शिक्षक विहीन मिले

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सिवनी मालवा । आदिवासी अंचल की शालों की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने पहुंची एसडीएम सरोज सिंह परिहार से ग्राम मोरघाट की माध्यमिक शाला में आठवीं कक्षा पढने वाली छात्राओं ने सकुचाते हुए कहा कि हम आगे और पढ़ाई करना चाहते हैं 15 किलोमीटर तक कोई हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं है, आप खुलवाइए । 

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आठवीं कक्षा की आदिवासी छात्रों की बात सुनकर एसडीएम ने प्रभारी प्राचार्य से चर्चा की। प्राचार्य ने बताया कि आसपास 15 किलोमीटर के एरिया में कहीं भी हायर सेकेंडरी स्कूल की व्यवस्था नहीं है । आदिवासी अंचल में प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं तक तो अध्ययन हो जाता है किंतु हाई सेकेंडरी कक्षाओं के लिए आसपास कोई स्कूल नहीं है ।

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आदिवासी बच्चे कक्षा आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं

आदिवासी अंचल में जहां-तहां प्राथमिक और माध्यमिक शालाएं तो हैं किंतु हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं है परिणाम स्वरूप कक्षा आठवीं के बाद आदिवासी अंचल के बालक और बालिकाएं पढ़ाई बंद कर देते हैं और खेती हर मजदूरी का काम शुरू कर देते हैं । गरीब आदिवासी छात्राओं के पालक आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं, जो छात्रों के आने-जाने का किराया खर्च नहीं बहन कर सकते इसलिए अधिकांश छात्राएं कक्षा आठवीं के बाद स्कूल छोड़ देते हैं ।

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46 बच्चों की माध्यमिक शाला में एक भी शिक्षक नहीं

एसडीएम में मोरघाट के माध्यमिक शाला का निरीक्षण किया । माध्यमिक शाला में कक्षा छठवीं से आठवीं तक 46 छात्र छात्रों की दर्ज संख्या पाई गई । लेकिन इस माध्यमिक शाला में एक भी रेगुलर शिक्षक नहीं है । माध्यमिक शाला की तीनों कक्षाएं अतिथि शिक्षक चला रहे हैं यही नहीं प्रधान पाठक भी नहीं है । आश्चर्य का विषय है कि माध्यमिक शाला में प्रधान पाठक के स्थान पर प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक कार्यभार संभाले हुए हैं ।  ऐसे ही स्थिति ग्राम लाही की प्राथमिक शाला की है । प्राथमिक शाला में 28 बच्चे हैं किंतु एक भी रेगुलर शिक्षक नहीं है अतिथि शिक्षक ने ही स्कूल संभाल रखा है । दूसरे स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक को ग्राम लही की प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक का प्रभाव सौंप रखा है । प्राथमिक शाला में पदस्थ अतिथि शिक्षक समय के पूर्वी शाला बंद कर जा रहे थे जिन्हें एसडीएम ने रोक कर प्राथमिक शाला का ताला खुलवाया । एसडीएम ने बच्चों से मध्यान भोजन के बारे में पूछने पर बच्चों ने बताया कि उन्हें दाल रोटी दी गई थी आशय यह है कि मध्यान भोजन मेंन्यू के आधार पर नहीं दिया जा रहा है ।

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सात माध्यमिक शालाओं पर एक भी हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं 

देश की आजादी को चाहे 78 साल पूरे हुए हों, विज्ञान में उन्नति कर देश चाहे चांद पर पहुंच गया हो लेकिन सिवनी मालवा विकासखंड में शिक्षा विभाग के अधिकारी आज भी आदिवासी अंचल के बच्चों को शिक्षित नहीं कर पा रहे हैं यही कारण है कि विकासखंड से 30 से 45 किलोमीटर दूर ग्राम लोखरतलाई, पलासी, मोरघाट, सामरर्धा, ढेकना, आम कटरा, और दबीदा जैसे स्कूलों में माध्यमिक शाला होने के बाद भी आज तक हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं खोल पाए हैं । जिसके कारण आदिवासी बच्चे हायर सेकेंडरी स्कूल की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं और उन्हें कक्षा आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ना पड़ती है । शिक्षा के क्षेत्र में यह एक दुखद पहलू है ।

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एसडीएम सरोज सिंह परिहार ने बताया कि क्षेत्र में हायर सेकेंडरी स्कूल खोलने के लिए वरिष्ठ कार्यालय को लिखा जाएगा । शिक्षक विहीन शालाओं के संबंध में उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया और कहा कि शालाओं में दर्ज संख्या बच्चों की पढ़ाई की और रुचि प्रकट करती है किंतु अव्यवस्था और लापरवाही के कारण शालाएं शिक्षक विहीन हैं‌ । 

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