महाराष्ट्र के अमरावती से माता वैष्णों देवी रोड पर लुढ़कते हुए की यात्रा
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अब वैष्णो देवी से कन्याकुमारी जा रहा है लुढ़कते-लुढ़कते
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इतनी दृढ़ इच्छा शक्ति की ना ढोल धमाका, ना दिखावा, नाबालिक बेटी के साथ यात्रा
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नगर में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब मुख्य मार्ग पर एक व्यक्ति ज़मीन पर लुढ़कते हुए दिखाई दिया । राहगीरों ने उत्सुकतावश जब उनसे बातचीत की तो उन्होंने अपना नाम देवीदास बताया और कहा कि वे महाराष्ट्र के अमरावती जिले के निवासी हैं। जब यह थाने के सामने गुजारा तो पुलिस ने भी उसको प्रोटेक्शन दिया । और पुलिस कर्मी भी उसके साथ-साथ नगर के बाहर तक चलने लगे ।
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देवीदास ने बताया कि लगभग 8 माह पूर्व उनके पुत्र को करंट लगने से उसकी हालत गंभीर हो गई थी। बेटे के जीवन की रक्षा के लिए उन्होंने माता वैष्णो देवी से मन्नत मांगी थी कि यदि पुत्र स्वस्थ हो जाएगा तो वे वैष्णो देवी धाम से कन्याकुमारी तक लुढ़कते हुए यात्रा करेंगे। पुत्र पूरी तरह स्वस्थ हो गया, और अब वे अपनी प्रतिज्ञा निभाने के लिए लुढ़कते लुढ़कते अपनी यात्रा पर रवाना हो गए ।
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करंट हादसे से टूटा परिवार, फिर बंधी आस्था की डोर

करीब 8 माह पहले करंट लगने के बाद पुत्र की स्थिति नाजुक बनी हुई थी। परिवार ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ डॉक्टरों की मेहनत और माता वैष्णो देवी की कृपा से उसकी जान बच सकी। उस समय देवीदास ने माता रानी से यह वचन लिया था कि पुत्र के जीवनदान के बदले वे अपनी देह को समर्पित कर कन्याकुमारी तक लुढ़ककर यात्रा करेंगे ।
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आस्था की राह पर कठिन तपस्या
अब जब पुत्र पूरी तरह स्वस्थ है, देविदास ने संकल्प पूरा करने के लिए कठिन तपस्या का मार्ग चुना है। वे वैष्णो देवी से कन्याकुमारी तक लुढ़ककर यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के दौरान लोग उन्हें देखकर चकित रह जाते हैं। रास्ते में श्रद्धालु उन्हें रोककर जलपान कराते हैं, पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और उनके दृढ़ विश्वास की सराहना करते हैं।
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आस्था का अद्भुत उदाहरण
देवीदास की यह यात्रा आम इंसान के लिए असंभव प्रतीत होती है, लेकिन बेटे के जीवन की रक्षा और माता वैष्णो देवी के प्रति अटूट आस्था ने उन्हें यह कठिन संकल्प पूरा करने की शक्ति दी है। उनकी यह अनोखी आस्था न केवल चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि समाज में श्रद्धा और विश्वास का प्रेरणास्रोत भी बन रही है।
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लोगों की प्रतिक्रियाएँ
स्थानीय लोगों में सर्राफा व्यापारी अनिल कलवानी, सिद्धार्थ चतर, विनोद सोनी ने कहा है – “यह आस्था का अद्भुत उदाहरण है। जब कोई मनुष्य माता रानी से मनोकामना की पूर्ति के लिए वचन लेता है और फिर उसे निभाता है, तो यही सच्ची श्रद्धा कहलाती है।” कई लोग उनकी हिम्मत और तपस्या देखकर भावुक हो जाते हैं और उन्हें माता रानी का सच्चा भक्त मानते हैं।








