पटाखा फैक्ट्री विस्फोट कांड : एक साथ 18 लोगों की चिता जली
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फटाका फैक्ट्री विस्फोट कांड में हंडिया 8 और संदलपुर 10 लोगों की हुई थी मौत
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शवों को एम्बुलेंस से सीधे नेमावर तट पर अंतिम संस्कार हेतु लाये
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बिना अर्थी सजाए शवों का किया अंतिम संस्कार
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18 चिताओं ने नर्मदा घाट को मातम में डुबोया
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अधजले अंग कपड़े में बंधे थे… अपनों का चेहरा भी नहीं देख सके
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6 को ताबूत व 12 शवों को पॉलीथिन हटाए बिना कपड़ों सहित किया अंतिम संस्कार
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मध्य प्रदेश के नर्मदा घाट में एक साथ धड़कती 18 चिताओं को देखकर सब दुखी हो गए । यह 18 लोग गुजरात स्थित बम फैक्ट्री में हुए विस्फोट में कालकलवित हो गए विस्फोट इतना भयानक था कि अनेक लोगों के अंग दूर-दूर तक फैल गए थे । फटाका फैक्ट्री विस्फोट कांड में हंडिया 8 और संदलपुर 10 लोगों की हुई मौत थी ।
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हंडिया व्यापारियों ने दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अपने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। और नेमावर घाट पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।

गुजरात के बनासकांठा के डीसा की पटाखा फैक्ट्री में 1 अप्रैल को बायलर फटने से हुए भीषण ब्लास्ट में 18 मौत हुई थी। इसमें हरदा जिले के हंडिया के फोकटपुरा के 8 और देवास के संदलपुर के 10 मृतक हैं। गुरुवार को सुबह सभी शवों को लेकर 10 एंबुलेंस मृतकों के घर के बजाए सीधे नेमावर में नर्मदा घाट पर पहुंची। एंबुलेंस में ही ताबूत खोलकर परिजनों को क्षत-विक्षत और जल चुके चेहरे दिखाए। कुछ के तो चेहरे भी नहीं दिखे। क्षत विक्षत शव देख परिजन चीख पड़े। नेमावर नर्मदा घाट पर 6 का ताबूत सहित 12 का कपड़ा और पॉलीथिन खोले बिना एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। 8 एंबुलेंस में दो-दो और 2 में एक-एक शव थे। अघ जले और क्षत-विक्षत हो चुके
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शवों से दुर्गंध आने लगी थी। इस कारण परिजन अंतिम समय में अपनों का चेहरा तक नहीं देख पाए। हंडिया के फोकटपुरा निवासी अमर (17) मुंह-नाक पर मास्क लगाए एंबुलेंस में चढ़ा। ताबूत का कवर निकालकर पॉलीथिन व सफेद कपड़े में लिपटे मां के शव का चेहरा बेटे को दिखाया। उसे देखकर अमर की चीख निकल गई। उसके भाई धनराज का तो चेहरा भी उसने ठीक से नहीं देखा वह जला हुआ था। एंबुलेंस पहुंचते ही इंतजार कर रहे परिजन और रिश्तेदार जोर-जोर से विलाप करने लगे। उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। एकसाथ चिताओं के जलने के दृश्य को देखकर नर्मदा तट पर मौजूद हर व्यक्तियों की आंखें नम हो गई। दैनिक भास्कर सभार








