रामदेव ने बुलाया है : 02 सितम्बर, मंगलवार विशाल शोभायात्रा
श्री बाबा रामदेव जी का अवतरण महोत्सव भादो सुदी दूज एवं विशाल शोभायात्रा भादो सुदी दसमीं को भव्य स्वरूप में मनाया जा रहा है। आप सभी धर्मप्रेमी सहपरिवार समस्त कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर बाबा का आशीर्वाद एवं धर्मलाभ प्राप्त करें ।
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बाबा के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति
25 अगस्त 2025, सोमवार प्रातः 11 बजे से
अजमेर की सुप्रसिद्ध भजन गायिका पिंकी जी गहलोत एवं अन्य सहयोगी मण्डलों द्वारा
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भादों सुदी दसमीं, 02 सितम्बर 2025, मंगलवार विशाल शोभायात्रा
दोप. 12 बजे से (सरस्वती परिसर) श्री हनुमान मंदिर के पास सि.मा.से बाबा रा देवरा भीलटदेव तक
शोभायात्रा का विशेष आकर्षण सुप्रसिद्ध भजन गायक अनिरुद्ध जी शर्मा, हैदराबाद द्वारा चलित प्रस्तुति
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महाआरती शाम 07:30 बजे
विशेष आकर्षणः महाआरती के समय रंगारंग आतिशबाजी का कार्यक्रम
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श्री बाबा रामदेवजी का अवतरण महोत्सव
भादों सुदी दूज, दिनांक 25 अगस्त 2025, सोमवार
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ध्वजा यात्रा
पूज्य भगवन् श्री अभिषेक एवं पूजन प्रातः 08 बजे
हवन एवं प्रसादी वितरण प्रातः 10:30 बजे से आचार्य श्री आदर्श गुरुजी पूजन के सभी कार्यक्रम आचार्य श्री आदर्श गुरूजी, गुप्त काशी के सानिध्य में सम्पन्न होगें ।
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श्री बाबा रामदेव जी – अवतरण महोत्सव एवं धार्मिक महत्ता
भारतभूमि संतों और महापुरुषों की भूमि रही है। इन्हीं में से एक अवतारी महापुरुष श्री बाबा रामदेव जी (बाबा रामदेवरा) हैं, जिनका जन्म राजस्थान की पावन धरा पर हुआ। जनमानस बाबा को “रामसपीर” के नाम से भी श्रद्धापूर्वक पुकारता है। बाबा को हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों में समान रूप से श्रद्धा प्राप्त है।
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बाबा रामदेव जी की जन्म
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ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार बाबा रामदेव जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल द्वितीया (भादो सुदी दूज) को सन् 1409 ई. में राजस्थान के पोकरण (जैसलमेर) के पास रुणिचा गाँव में राजघराने में हुआ। उनके पिता अजमलजी तंवर परमार वंशीय राजा थे। जन्म के समय ही यह संकेत मिल गया था कि वे कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि ईश्वर के दिव्यांश हैं। बचपन से ही बाबा रामदेव जी में करुणा, दया, समता और सेवा की अद्भुत भावना रही।
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बाबा रामदेव जी की विशेषता एवं लोकसेवा
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बाबा ने सदैव निर्बल, गरीब, शोषित और दलित वर्ग की सहायता की।
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उन्होंने समाज को समानता और भाईचारे का संदेश दिया।
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उनके दरबार में कोई जाति, पंथ, धर्म का भेदभाव नहीं था।
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लोककथाओं के अनुसार, बाबा ने अपने अलौकिक चमत्कारों से अनेक पीड़ितों की सहायता की।
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उनकी शिक्षाओं का मूल संदेश था – “सत्य, करुणा और सेवा”।
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प्रसिद्धि और श्रद्धा
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बाबा रामदेव जी का स्थान रामदेवरा (जैसलमेर) आज भी जन-जन का तीर्थ है, जहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिवर्ष भादवा मेले में पहुँचते हैं।
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मुस्लिम समाज उन्हें “रामसपीर” मानकर उनकी दरगाह पर चादर चढ़ाते हैं।
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बाबा के भजन और लोकगीत विशेषकर राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और देशभर में गाए जाते हैं।
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उनके भजनों में गहरी श्रद्धा और आध्यात्मिक संदेश समाहित है।
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अवतरण महोत्सव का महत्व
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भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को बाबा का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
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ध्वजा यात्रा से लेकर अभिषेक, पूजन, हवन, भजन संध्या और शोभायात्रा तक सभी कार्यक्रम भक्तों के उत्साह और भक्ति का प्रतीक होते हैं।
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विशाल शोभायात्रा में भक्तजन बाबा की झांकी, भजनों और नृत्य के साथ भाग लेते हैं।
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महाआरती और आतिशबाजी वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना देती है।
श्री बाबा रामदेव जी का जीवन हमें सिखाता है कि समाज में जात-पात, ऊँच-नीच या धर्म का भेदभाव नहीं होना चाहिए। हर मनुष्य में ईश्वर का वास है। सेवा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलकर ही सच्चा धर्म लाभ प्राप्त होता है। बाबा रामदेव जी का अवतरण महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समानता, भाईचारे और लोककल्याण का उत्सव है।